Monday, August 7, 2017

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प्रेम-सुरभित  पत्र
 डॉ कविता भट्ट
(हे न ब गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर (गढ़वाल), उत्तराखंड
 1
कितना भी जीवन खपा लो, अब तो सच्चा मित्र नहीं मिलता
हृदय-उपवन को महका दे जो, वो मादक इत्र नहीं मिलता
शब्द-ध्वनि-नृत्य-घुले हों जिसमें, अब वो चलचित्र हुआ दुर्लभ 
उर को सम्मोहित कर दे जो, अब रंगीन चित्र नहीं मिलता
2
जूठे बेर से भूख मिटा ले जो, अब वो भाव विचित्र नहीं मिलता
शिला-अहल्या बोल उठी जिससे, अब वो राम-चरित्र नहीं मिलता
विरह में भी जीवन भर दे जो, वो राधा-प्रेम ढूँढती हूँ
एक मुट्ठी चावल में , कान्हा का प्रेम पवित्र नहीं मिलता
3
मैत्री -दिवस के संदेश में, प्रेम-सुरभित  पत्र खोए किधर
तुम्हीं मिल जाना मुझे किसी भी  दिन किसी  भी मोड़ पर प्रियवर
आँसू पी जाएँ अधरों से,  वे प्रेमी अब कहीं  नहीं मिलते
छाया मैं तुम्हारी हूँ और तुम्हीं मेरे  प्राणों के तरुवर ।

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16 comments:

  1. हमेशा की तरह बहुत ही बेहतरीन सृजन
    हार्दिक बधाई कविता जी

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    1. हार्दिक आभार, आदरणीया सत्या जी।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (08-08-2017) को "सिर्फ एक कोशिश" (चर्चा अंक 2699) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. बहुत उम्दा मनोभाव की कविता । बहुत बधाई व रक्षाबंधन की शुभकामनायें ।

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  4. बहुत भावपूर्ण रचना कविता जी हार्दिक बधाई।

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  5. बहुत ही बेहतरीन article लिखा है आपने। Share करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। :) :)

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  6. बहुत सुंदर सृजन कविता जी बहुत बधाई।

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  7. Bahut bhavpurn rachna bahut bahut badhai.

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  8. दिल से निकले भावों को सुन्दर शब्दों में पिरोने की कला कविता जी आपमें भरपूर है |बहुत सुन्दर सृजन है |हार्दिक बधाई |

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  9. बहुत सुन्दर भाव पिरोये कविता जी अपनी रचना में । बहुत अच्छी लगी यह पंक्तियाँ - कितना जीवन खपा लो अब वो सच्चा मित्र नहीं मिलता .... हार्दिक बधाई ।

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  10. बहुत प्यारी पंक्तियाँ...मेरी हार्दिक बधाई...|

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  11. बहुत सुन्दर रचना कविता जी !
    हार्दिक बधाई !!

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  12. BAHUT KHUBSURAT RACHNA.. BADHAI SWEEKAR KAREIN..

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  13. बहुत भावपूर्ण रचना कविता जी हार्दिक बधाई!!!

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  14. आप सभी आत्मीय जनों का आभार पढने एवं सराहने हेतु/

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