Sunday, April 9, 2017

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ताँका :डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा1घिरी घटाएँहो गया था आकाशगहरा कालासंकल्पों के सूरजदेते रहे उजाला ।2पवन संगनाच उठीं पत्तियाँकली मुस्काईसुनहरा झूमरपहन कौन आई ?3डोरी से बँधीपतंग हूँ मैं प्यारीऊँचाइयों पेदिखो न दिखो तुमपर लीला तुम्हारी ।।-0-


16 comments:

  1. संकल्पों के सूरज
    देते रहे उजाला ।

    बहुत सुंदर सकारात्मक भाव !! बधाई।

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    1. सुंदर सृजन हेतु बधाई, महोदया

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  2. प्रेरक उपस्थिति के लिए बहुत आभार अनिता मंडा जी ,कविता जी ,पूर्णिमा जी तथा
    मेरी रचनाओं को यहाँ स्थान देने के लिए हृदय से धन्यवाद भैया जी 💐🙏💐

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  4. वाह बहुत सुंदर ताँका सखी ..हार्दिक बधाई

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  5. बहुत खूबसूरत ताँका ज्योत्स्ना जी।

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  6. रसात्मक अभिव्यक्ति

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  7. Dori se bandhi\ patang hun main pyari .......leela tumhari.us adrishy ke prati jiske ishare par hi hum sab nachte hain,sunder abhivykti.jyotsnaji badhai.pushpa mehra

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  8. वाह बहुत सुंदर ताँका ...सुंदर सृजन हेतु बधाई सखी ज्योत्स्ना जी!!

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  9. लीला तुम्हारी ..........
    बहुत सुंदर ताँका !!

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  10. सखी सुनीता जी , कृष्णा दी , आ रमेशराज जी , पुष्पा दी ,सखी ज्योत्स्ना जी , आ रेखा जी ..आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ |
    आपकी सहृदय उपस्थिति मेरे लेखन की ऊर्जा है |

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  11. ज्योत्स्ना जी बहुत सुन्दर तॉंका के लिए आपको बधाई ।

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  12. बहुत सुन्दर ताँका ज्योत्स्ना जी संकल्पों के सूरज देते रहे उजाला । पवन के नाचने का क्या खूब वर्णन किया ।बहुत अच्छा लगा ।बधाई इतने सुन्दर ताँका के लिये ।

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  13. सुन्दर तांका, बहुत बधाई...|

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  14. Hruday se aabhaar aa. Kamla ji ,renuchandra ji evam Priyanka ji ..bahut dhanyawaad 💐🙏💐

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